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Tuesday, July 15, 2014

किशोर वय व लड़के-लड़कियां सामाजिक मूल्यों, नैतिकताओं और वर्जनाओं से उदासीन और लापरवाह होते चले जा रहे हैं...

माडर्न लाइफ स्टाइल " की गिरफ्त में कसमसाने लगी है। किशोर वय व लड़के-लड़कियां सामाजिक मूल्यों, नैतिकताओं और वर्जनाओं से उदासीन और लापरवाह होते चले जा रहे हैं। दूसरे शब्दों में जीवन पर इसका संक्रमण तीव्र गति से फैल रहा है


पश्चिमी मुखौटे के अंदर समाज का वह विद्रूप चेहरा ज्यादा सक्रिय हो उठा है, जो घिनौना है, काम-वासना से भरा हुआ है। शहर के गली-कूचे इस संक्रमण से प्रभावित देखे जा सकते हैं। शराब-सिगरेट पीना, हलकी मादक दवाएं लेना, चुप-चुप सैर सपाटा, अचानक स्कूल से गायब हो जाना, साइबर कैफे में इंटरनेट पर अश्लीलता से सराबोर होना और बार आदि में जाना और जाने के लिए झूठ बोलना, ऐसे परिधानों का चयन करना, जिन्हें वे घर में भी पहनने का साहस जुटा नहीं पाते । यह सब फैशन के नाम कुप्रचलन बन गया है। इसका निवारण आवश्यक अन्यथा वह दिन दूर नही जब यह धरती गंदगी से इतना भर जाएगी कि , यही जीते जी नर्क हो जाएगी । 
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