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Saturday, August 16, 2014

कितनी धार्मिक किताबें पढ़ना चाहिए?

कितनी धार्मिक किताबें पढ़ना चाहिए? अपने घर में उपलब्ध रामायण, महाभारत, भागवत, गीता, पुराण और अनगिनत धार्मिक कथाओं को पढ़ने का अवसर तो 10-11 वर्ष की उम्र में ही मिल चुका था। उन से संतुष्ट न होने पर बाइबिल पढ़ी, फिर क़ुरआन भी पढ़ी। किसी ने भी संतुष्टि प्रदान नहीं की। कोई किताब लूट के खिलाफ नहीं बोलती। बस लुटेरे को लूटने दो, तुम खुद अच्छे इंसान बननेे की कोशिश करो, लुटेरे को उस का दंड ईश्वर देगा। बस उस काल्पनिक ईश्वर के भरोसे लूट का ये कारोबार सदियों से चला आ रहा है। कोई किताब लूट के कारोबार को खत्म करने का रास्ता नहीं बताती। ऐसा लगता है ईश्वर दुनिया भर के लुटेरों का सरगना है जो लगातार इस बात का इंतजाम करता रहता है कि किसी तरह लूटेरे बचे रहें और इंसानों को ठगते रहें। इन्सान बस इसी तरह स्वर्ग, नर्क और परलोक के स्वप्निल नशे में डूबे लुटते रहें।