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Wednesday, July 9, 2014

उस दिन "बुलेट ट्रैन" की सोचना....

" समय की माँग - ईमानदार नीयत, दृढ़ इच्छाशक्ति और देशसेवा की भावना "
अभी हाल में 14.2% रेल किराये में बढ़ोतरी से मात्र 8000 करोड़ मिलेंगे ,.... पर इससे पहले से दबा-कुचला आम आदमी का जीना और मुहाल हो गया है।
क्या सरकार नहीं जानती कि देश में फैले व्यापक भ्रष्टाचार से रेलवे भी अछूती नहीं है ,.... ट्रेनों में तिल भर जगह नहीं, बाहर और ऊपर तक भर कर चल रही हैं ,.... फिर रेलवे घाटे में क्यों है ? ,.... अकेला "आयरन ओर ढुलाई" घोटाला ही पच्चास हज़ार करोड़ रूपए का है।
मतलब साफ़ है, सबसे पहले, देश से भ्रष्टाचार जड़मूल से मिटाना होगा ,.... जनलोकपाल, स्वराज, नापसन्दी, भ्रष्टों को वापिस बुलाने के बुनियादी अधिकार जनता को देने होंगे ,.... चुनाव, पुलिस, न्यायिक प्रणाली और जांच एजेन्सीयां स्वायत कर सुधारनी होंगी ,.... तभी देश और हर विभाग फायदे में आएगा ,.... फिर किराया बढ़ाने के बजाये घटाना पडेगा ,.... पानी मुफ्त मिलेगा ,.... बिजली, यातायात और सब वस्तुएं एकदम सस्ती होंगी ,…. हर बच्चे को अनिवार्य मुफ्त शिक्षा मिलेगी ,.... हर आम आदमी को रोटी कपडा, मकान और रोज़गार मिलेगा ,.... अंतिम आम आदमी तक सब सुखी होंगे।
जिस दिन, देश आत्म-निर्भर और अंतिम आम आदमी सुख-संपन्न हो जाए ,.... रेल का जनरल डिब्बा साफ़, इसका शौचालय ठीक और हर यात्री को पूरी सीट मिले ,.... उस दिन "बुलेट ट्रैन" की सोचना।
इसलिए, समय की माँग है - ईमानदार नीयत, दृढ़ इच्छाशक्ति और देशसेवा की भावना ! अन्यथा बाकी सब छलावा है।
जय हिन्द !
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